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गर्मी की दोपहर

यह पुरानी PDF कहानी का रूपांतरण है.कहते हैं कि किसी औरत को गैर-मर्द के साथ अकेला नहीं छोड़ना चाहिये क्योंकि मर्द उसे पकड़ कर चोदने की ही सोचेगा।कैसे इसकी चूत में अपना लंड डाल दूँ – यही ख्याल उसके मन में कुलबुलायेगा।दोस्तो,गर्मीकीदोपहर मेरे साथ ऐसा ही हुआ।गर्मी के दिन थे और भरी दोपहर थी।मैं अपने घर में अकेला था क्योंकि अभी मेरी शादी नहीं हुई थी।मैंने घर में कुछ ज़रूरी काम करने के लिये ऑफिस से छुट्टी ले रखी थी।काम निबटा कर मैं बेडरूम में ठंडी बीयर का आनन्द ले रहा था।करीब एक बजे दरवाजे पर हुआ टिंग-टोंग!मैंने दरवाजा खोला तो सामने मानो एक अप्सरा खड़ी थी।पैंतीस-छत्तीस साल की साँवली और गज़ब की सुंदर औरत साड़ी पहने हुए और हाथों में कागज़ और कलम लिये हुए कोयल का आवाज़ में बोली- माफ़ कीजियेगा! क्या कोई लेडी हैं घर में?मैंने कहा- जी नहीं, मैं बेचलर हूँ और अकेला ही रहता हूँ। आप कौन हैं?उसके माथे पर पसीने की कुछ बूंदें थी, वह बोली- ज़रा एक ग्लास पानी मिलेगा?मैंने कहा- हाँ, क्यों नहीं?वह ज़रा सा अंदर आयी।मैंने पानी का ग्लास देते हुए पूछा- क्या बात है, आप हैं कौन?पानी पी कर वह बोली- जी, मेरा नाम सना खान है और मुझे एक कनज़्यूमर कंपनी ने भेजा है सर्वे के लिये। क्या आप मेरे कुछ सवालों का जवाब दे देंगे?मैंने कहा- जी कोशिश कर सकता हूँ। आप प्लीज़ यहाँ बैठ जाइये।वह सोफ़े पर बैठ गयी और हमारे घर का दरवाजा अभी खुला ही था।मैंने दूसरे सोफ़े पर बैठ कर कहा- पूछिये जो पूछना है।वो बोली- जी आपका नाम और आपकी उम्र क्या है?“जी मैं प्रताप सिंह हूँ और उम्र छब्बीस साल!” मैंने जवाब दिया।“आप अपने घर की ज़रूरत की चीजें कहाँ से खरीदते हैं?”इस तरह वो सवाल पर सवाल पूछती रही और मैं जवाब देता गया।कुछ देर बाद मैंने पूछा- इस तरह इतनी गर्मी के मौसम में भी आप क्या सब घरों में जाकर सर्वे करती हैं?“जी, जॉब तो जॉब ही है ना!”“तो आप शादी शुदा होकर (उसने बड़ी सी अंगूठी पहनी हुई थी) भी जॉब कर रही हैं?”अब वो भी थोड़ी-सी खुल सी गयी, बोली- क्यों, शादी शुदा औरत जॉब नहीं कर सकती?“जी यह बात नहीं, घर-घर जाना, जाने किस घर में कैसे लोग मिल जायें?”उसने जवाब दिया- वैसे तो दिन के वक्त ज्यादातर हाऊसवाइफ ही मिलती हैं। कभी-कभी ही कोई मेल मेंबर होता है।“तो आपको डर नहीं लगता।”“जी अभी तक तो नहीं लगा। फिर आप जैसे शरीफ इंसान मिल जायें तो क्या डर?”‘शरीफ इंसान’ – एक बार तो सुन कर अजीब लगा।इसे क्या मालूम कि मैं इसे किस नज़र से देख रहा था।साड़ी और ब्लाऊज़ के नीचे उसकी चूचियाँ तनी हुई थीं और मेरे लंड में खुजली सी होने लगी।जी चाह रहा था कि काश सिर्फ़ एक बार चूम सकता और ब्लाऊज़ के नीचे उन चूचियों को दबा सकता।हाथों की अँगुलियाँ लंबी-लंबी मुलायम सी!वैसे ही मुलायम से सैक्सी पैर ऊँची ऐड़ी के सैंडलों में कसे हुए।देख-देख कर लंड महाराज खड़े हो ही गये।मन में ज़ोरों से ख्याल आ रहा था कि क्या गज़ब की अप्सरा है।इसकी तो चूत को हाथ लगाते ही शायद हाथ जल जायेगा।तभी वह बोली- अच्छा, थैंक्स फ़ोर एवरीथिंग। मैं चलती हूँ।मानो पहाड़ टूट गया मेरे ऊपर!चली जायेगी तो हाथ से निकल ही जायेगी।अरे प्रताप, हिम्मत करो, आगे बढ़ो, कुछ बोलो ताकि रुक जये।इसकी चूत में अपना लंड नहीं डालना है क्या? चूत में लंड? इस ख्याल ने बड़ी हिम्मत दी।“माफ़ कीजियेगा सना जी, आप जैसी खूबसूरत औरत को थोड़ा केयरफुल रहना चाहिये।” मैंने डरते हुए कहा।“खूबसूरत?”मैं थोड़ा सा घबराया, लेकिन फिर हिम्मत करके बोला- जी, खूबसूरत तो आप हैं ही। बुरा मत मानियेगा। आप प्लीज़ अब तो चाय पीकर ही जाइये।“चाय, लेकिन बनायेगा कौन?”“मैं जो हूँ, कम से कम चाय तो बना ही सकता हूँ।”वह हंसते हुए बोली- ठीक है… लेकिन इतनी गर्मी में चाय की बजाय कुछ ठंडा ज्यादा मुनासिब होगा!मैंने कहा- क्यों नहीं… क्या पीना पसंद करेंगी… नींबू शर्बत या पेप्सी… वैसे मैं भी आपके आने के पहले चिल्ड बीयर ही पी रहा था!“तो फिर अगर आपको ऐतराज़ ना हो तो मैं भी बीयर ही ले लूँगी!”मुझे उससे इस जवाब की उम्मीद नहीं थी लेकिन मुझे बहुत खुशी हुई।मैंने उसे फिर बैठने को कहा और किचन में जाकर दो ग्लास और फ्रिज में से बीयर की दो ठंडी बोतलें निकाल कर ले आया।हम दोनों बीयर पीने लगे और इधर मेरा लंड उबल रहा था।पहली बार किसी औरत के साथ बैठ कर बीयर पी रहा था और वो भी इतनी सुंदर औरत – और मुझे पता नहीं था कि कैसे आगे बढ़ूँ।तभी वो बोली- आप अकेले रहते हैं… शादी क्यों नहीं कर लेते?मैंने जवाब दिया- जी, घर वाले तो काफी ज़ोर दे रहे हैं लेकिन कोई लड़की अभी तक पसंद ही नहीं आयी!अब और हिम्मत करके मैंने कहा- सना जी, आप वाकयी में बहुत खूबसूरत हैं और बहुत अच्छी भी! आपके हसबैंड बहुत ही खुशनसीब इंसान हैं।“आप प्लीज़ बार-बार ऐसे ना कहिये। और मुझे सना जी क्यों कह रहे हैं। मैं उम्र में आपसे बड़ी ज़रूर हूँ लेकिन इतनी ज़्यादा भी नहीं!” वो इतराते हुए अदा से मुस्कुरा कर बोली।दोस्तो, यह हिंट काफ़ी था मेरे लिये!मैं समझ गया कि ये अब चुदवाने को आसानी से तैयार हो जायेगी।हमारी बीयर भी खत्म होने आयी थी।“ठीक है, सना जी नहीं … सना … तुम भी मुझे आप-आप ना कहो! वैसे तुम कितनी खूबसूरत हो, मैं बताऊँ?”“कहा तो है तुमने कई बार। अब भी बताना बाकी है?”“बाकी तो है। अपनी बीयर खत्म करके बस एक बार अपनी आँखें बन्द करो … प्लीज़!”दो-तीन घूँट में जल्दी से बीयर खतम करके उसने आँखें बंद की।मैंने कहा- आँखें बंद ही रखना!अब मैंने उसे कुहनी से पकड़ कर खड़ा किया और हल्के से मैंने उसके गुलाबी-गुलाबी नर्म-नर्म होंठों पर अपने होंठ रख दिये।एक बिजली सी दौड़ गयी मेरे शरीर में! लंड एकदम तन गया और पैंट से बाहर आने के लिये तड़पने लगा।उसने तुरन्त आँखें खोलीं और अवाक सी मुझे देखती रही और फिर मुस्कुरा कर और शर्मा कर मेरी बाँहों में आ गयी।मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा।कस कर मैंने उसे अपनी बाँहों में दबोच लिया।ऐसा लग रहा था बस यूँ ही पकड़े रहूँ।फिर मैंने सोचा कि अब समय नहीं बर्बाद करना चाहिये।पका हुआ फल है, बस खा लो।तुरंत अपनी बाँहों में मैंने उसे उठाया (बहुत ही हल्की थी) और बेडरूम में लाकर बिस्तर पर लिटा दिया।उसकी आँखों में प्यास नज़र आ रही थी।साड़ी और सैंडल पहने हुए बिस्तर पर लेटी हुई वो प्यार भरी नज़रों से मुझे देख रही थी।ब्लाऊज़ में से उसके बूब्स ऊपर नीचे होते हुए देख कर मैं पागल हो गया।आहिस्ते से साड़ी को एक तरफ़ करके मैंने उसकी दाहिनी चूची को ऊपर से हल्के से दबाया।एक सिरहन सी दौड़ गयी उसके शरीर में!वो तड़प कर बोली- प्लीज़ प्रताप! जल्दी से! कोई आ ही ना जाये।“घबराओ नहीं, सना डार्लिंग … बस मज़ा लेती रहो। आज मैं तुम्हे दिखला दूँगा कि प्यार किसे कहते हैं। खूब चोदूँगा मेरी रानी!” मैं एकदम फ़ोर्म में था।यह कहते हुए मैंने उसकी चूचियों को खूब दबाया और होंठों को कस-कस कर चूसने लगा।फिर मैंने कहा- चुदवाओगी ना?आह! गज़ब की कातिलाना मुस्कुराहट के साथ बोली- प्रताप! तुम भी… बहुत बदमाश हो… तो क्या बीयर पी कर यहाँ तुम्हारे बिस्तर पे तीन पत्ती खेलने के लिये तुम्हारे आगोश में लेटी हूँ! अब इस भरी दोपहर में दर-दर भटकने की बजाय यही अच्छा है।“सना रानी, बदमाश तो तुम भी कम नहीं हो!” और उसके नर्म-नर्म गालों को हाथ में ले कर होंठों का खूब रसपान किया।मैं उसके ऊपर चढ़ा हुआ था और मेरा लंड उसकी चूत के ऊपर था।चूत मुझे महसूस हो रही थी और उसकी चूचियाँ … गज़ब की तनी हुई … मेरे सीने में चुभ-चुभ कर बहुत ही आनंद दे रही थी।दाहिने हाथ से अब मैंने उसकी बाँयी चूची को खूब दबाया और एक्साईटमेंट में ब्लाऊज़ के नीचे हाथ घुसा कर उसे पकड़ना चाहा।“प्रताप, ब्लाऊज़ खोल दो ना!”उसका यह कहना था और मैंने तुरन्त ब्लाऊज़ के बटन खोले और उसे घुमा कर साथ ही साथ ब्रा का हुक खोला और पीछे से ही उसके बूब्स को पूरा समेट लिया।आहा … क्या फ़ीलिंग थी, सख्त और नर्म दोनों, गर्म मानो आग हो।निप्पल एकदम तने हुए।जल्दी-जल्दी मैंने ब्लाऊज़ और ब्रा को हटाया; साड़ी को परे किया और पेटीकोट के नाड़े को खोल कर उसे हटाया।पिंक पैंटी और सफेद हाई-हील के सैंडल पहने हुए सना को नंगी लेटी हुई देख कर तो मैं बर्दाश्त ही नहीं कर सका।मैंने अब अपने कपड़े जल्दी-जल्दी उतारे।लंड तन कर बाहर आ गया और ऊपर की तरफ़ हो कर तड़पने लगा।उसका एक हाथ लेकर मैंने अपने फड़कते हुए लंड पर रख दिया।“उफ हायल्ला कितना बड़ा और मोटा है!” वह बोली और आहिस्ता-आहिस्ता लंड को आगे पीछे हिलाने लगी।शादीशुदा औरत को चोदने का यही मज़ा है; कुछ सिखाना नहीं पड़ता।वो सब जानती है और आमतौर पर शादी शुदा औरतें फैमली प्लैनिंग के लिये पिल्स या कोई और इंतज़ाम करती हैं तो कंडोम की भी ज़रूरत नहीं।मैंने आखिर पूछ ही लिया- सना डार्लिंग, कंडोम लगाऊँ?वो मुँह हिलाते हुए मना करते हुए खिलखिलायी- सब ठीक है। मैं पिल्स लेती हूँ।मैंने अब उसके बदन से उस पिंक पैंटी को हटाया और इत्मीनान से उसकी चूत को निहारा।एकदम साफ चिकनी सुंदर सी चूत थी। कुछ फूली हुई थी।मैंने उसके ऊपर हाथ रखा और हल्के से दबाया।अँगुली ऐसे घुसी जैसे मक्खन में छूरी।रस बह रहा था और चूत एकदम गीली थी।मैं जैसे सब कुछ एक साथ कर रहा था। कभी उसके होंठों को चूसता, चूचियों को दबाता – कभी एक हाथ से कभी दोनों से!एकदम टाइट गोल और तनी हुई चूचियाँ।उसके सोने जैसे बदन पर कभी हाथ फिराता।फिर मैंने उसकी चूचियों को खूब चूसा और अँगुलियों से उसकी बूर में खूब अंदर बाहर करके हिलाया।“सना, अब मैं नहीं रह सकता, अब तो चोदना ही पड़ेगा। कस-कस कर चोदूँगा मेरी रानी।”पहली बार उसके मुँह से अब सुना- चोद दो ना प्रताप, बस अब चोद दो।मज़ा लेते हुए मैंने पूछा- क्या चोदूँ जानेमन? एक बार फिर से कहो ना! तुम्हारे मुँह से सुनने में कितना अच्छा लग रहा है।“अब चोदो ना … इस … इस चूत को!”“अब मैं तेरी गर्म-गर्म और गुलाबी-गुलाबी बूर में अपना ये लंड घुसाऊँगा और कस-कस कर चोदूँगा।”मैंने अपना लंड उसकी बूर के मुँह पर रखा और हल्के से धक्का दिया।उसने अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़ा और गाईड करते हुए अपनी चूत में डाल दिया।दोस्तो, मानो मैं जन्नत में आ गया।मैं बोल ही उठा- उफ़, क्या चूत है सना … मज़ा आ गया।उसने भी उत्तेजित होकर कहा- चोद दो प्रताप … बस अब इस चूत को खूब चोदो।दोस्तो … चूचियाँ दबाते हुए, होंठ चूसते हुए ज़ोर-ज़ोर से चोद-चोद कर ऐसा मज़ा मिल रहा था कि पता ही नहीं चला कि कब मैं झड़ गया।झड़ते-झड़ते भी मैं उसे बस चोदता ही रहा और चोदता ही रहा।“सना … बहुत मजेदार चुदाई थी यार! तुम तो गज़ब की चीज़ हो।”“मुझे भी बेहद मज़ा आया, प्रताप।” वो कसकर मुझे पकड़ते हुए बोली।उसकी चूचियाँ मेरे सीने से लग कर एक अलग ही आनंद दे रही थी।दोस्तो, फिर बीस मिनट बाद पहले तो मैंने उसकी बूर को चाटा और उसने मेरे लंड को चूसा, हल्के-हल्के!फिर हमने कस-कस कर चुदाई की और इस बार झड़ने में काफी समय लगा।मैंने शायद उसकी चूचियाँ और चूत और होंठ और गाल के किसी भी अंग को चूसे बगैर नहीं छोड़ा।इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया था।बस गज़ब की चीज़ थी वो औरत!कपड़े पहनने के बाद मैंने पूछा- सना, अब तो तुम्हें और कई बार चोदना पड़ेगा। अपनी इस प्यारी सी चूत और प्यारी-प्यारी चूचियों और प्यारे-प्यारे होंठों और प्यारी-प्यारी सना डार्लिंग के दर्शन करवाओगी ना?मैंने उसका फोन नंबर ले लिया और कह दिया कि मैं बता दूँगा जिस दिन मैं दिन में घर पे होऊँगा!अब वह मुझसे फ़्री हो गयी थी और बोली- प्रताप, डोंट वरी, जब भी मुनासिब मौका मिलेगा खूब चुदाई करेंगे!उसकी यह बात सुनते ही मैंने उसे एक बार और बाँहों में भींच लिया और उसके होंठों का एक तगड़ा चुंबन लिया।फिर वो मेरे बंधन से आज़ाद होकर दरवाजे से बाहर निकल गयी।कुछ दूर जाकर पीछे मुड़ी और एक मुस्कान बिखेर कर धीरे-धीरे मेरी आँखों से ओझल हो गयी।

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